व्यक्ति एक व्यक्तित्व अनेक – ब्रह्माकुमार भ्राता जगदीश चन्द्र एक जीवन्त जीवन-पथ

अलौकीक जन्म और बचपन

मधुबन पहुँचते ही यह बाबा के कमरे में गया। उस समय गीत बजा, ’आख़िर वो दिन आया आज, जिस दिन का रस्ता तकते थे…।’ बड़ी आवाज़ से रोते-रोते जगदीश भाई बाबा के गले में लिपट गया। मैं यह दृश्य देखकर निश्चिन्त हो गयी कि यह बलि चढ़ गया, अब मेरे को कोई चिन्ता नहीं। मैं तीन लोगों को लेकर गयी थी, एक था अविनाश चन्द्र, दूसरा था विशन चन्द्र और तीसरा था यह जगदीश चन्द्र। वो दो तो बहुत सीधे-सीधे थे, लगते थे बड़े निश्चय-बुद्धि हैं। यह एक ही था जिसकी खोपड़ी बहुत तेज़ थी। मगर यही एक सच्चा निकला, बाद में वो दोनों चले गये।

बाबा का अति लाडला लाल था मैं तो बार-बार यही कहती हूँ कि जगदीश भाई बाबा का अति लाडला लाल था। जिस दिन से पैदा हुआ, उस दिन से ही उसको लगन थी कि बाबा का नाम बाला करना है, बाप को प्रत्यक्ष करना है, स्वयं भगवान धरती पर आया है और उसी तन में आया है। इस प्रकार, जगदीश भाई को ज्ञान की गहराई में जाने का बहुत शौक था, मुरली पर तो वो दीवाना था। हम यह कहें कि जगदीश भाई बाबा का सच्चा लाल था। पहले दिन फार्म भरने से लेकर अन्त तक वह बाबा का एकदम वफ़ादार, ईमानदार, आज्ञाकारी, बलिहार बच्चा बनकर रहा।

एक बार भ्राता जगदीश जी ने अपना अनुभव सुनाते-सुनाते यह बात कही कि बाबा भी उनको बहुत चाहते थे और महत्व देते थे – बाबा के साथ रहने का मुझे जो मौका मिला वो कोई कम नहीं मिला। ये बहनें तो सेन्टर पर चली जाती थीं सेवा करने के लिए। मैं तो रहता ही बाबा के पास था। रात-दिन वहीं रहता था। कहीं सेवा के लिए बाबा भेजते थे तो जाता था। और हम कहॉं जाते ? उस समय बहुत थोड़ी-सी सेवा थी। उन दिनों थोड़ी-सी मुरलियॉं निकलती थीं, वो हाथ से लिखी जाती थीं। सिन्धी में लिखी रहती थी। क्योंकि उन दिनों सिन्धी जानने वाली ही टीचर्स थीं, वही सुनाती थीं।

मेरे ख़्याल में, शुरू-शुरू में 10-15 साल तक कोई एक भी मुरली ऐसी नहीं होगी जिसमें बाबा ने मुझे याद न किया हो, जगदीश बच्चे को याद न किया हो। दस-पन्द्रह साल तक लगातार। जो पुरानी बहनें हैं उनको मालूम है, जैसे गुलजार दादी है, मनोहर दादी है, जानकी दादी है। ये पढ़ते थे मुरली, कहते थे, बाबा ने उसको याद किया है। बाबा से हम मिलने जाते थे, तब कोई बहनें बैठी हों, बाबा से बात कर रही हों, तो बाबा बहनों को कहते थे, बच्चे, अब आप जाओ। सबको भेज देते थे, फिर मेरे से बात करते थे।