शाश्‍वत यौगिक खेती – भाग 2 (सफलता के आयाम) – जमीन को शक्तिशाली बनाने के लिए

किसान भाई-बहनों के अनुभव

मैं पिछले 11 वर्षों से ब्रह्माकुमारीज़ का विद्यार्थी हूँ, मैं करीब 20 वर्षों से नैसर्गिक पद्धति से खेती करता आया हूँ। और मेरा शुरू से प्रकृति के साथ बड़ा ही प्रेम का व्यवहार रहा है। मैंने यह देखा कि वनस्पति में भी संवेदना के साथ महसूस करने की शक्ति होती है, उन संवेदनाओं के साथ मैंने वनस्पति के साथ गहरा सम्बन्ध जोड़ा है। जिसकी वजह से पॉंचों तत्व हमेशा ही सहयोग देते रहते हैं।

72 वर्ष पूर्व मेरी मुलाकात मैसूर के ब्रह्माकुमार प्राणेश भाई जी से हुई, उन्होंने मुझे ग्राम विकास प्रभाग के अन्तर्गत चल रही सेवाओं के बारे में कुछ किसानों के प्रैक्टिकल अनुभवों सहित जानकारी दी। उनके मार्गदर्शन में (5 गुंठा) खेती के लिये शाश्वत यौगिक खेती पद्धति को अपनाया, इसका बहुत ही अच्छा परिणाम देखकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।