आंतरिक बल (भाग – 1)-स्व संवाद

जब हम बायें स्वर से सांस लेते हैं तो हम 4,8,12,16 और 20 मिनट आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी तत्व से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। नाक से जो सांस ले रहे हैं उसमें कौन सा तत्व चल रहा है यह भी जाना जा सकता है। यदि नासिका के बीच में स्वर (सांस) चल रहा हो तो पृथ्वी तत्व, नीचे चल रहा हो तो जल तत्व, ऊपर चल रहा हो तो अग्नि तत्व, तिरछा चल रहा हो तो वायु तत्व, घूमता हुआ चल रहा हो तो आकाश तत्व समझना चाहिये। कुछ घण्टों तक बिना कुछ खाये पीये मुँह के स्वाद का परीक्षण करें। यदि मुँह का स्वाद मीठा हो तो पृथ्वी तत्व, कसैला हो तो जल तत्व, कड़वा हो तो अग्नि तत्व, खट्टा हो तो वायु तत्व और तीखा हो तो आकाश तत्व समझना चाहिये। हम स्वर बदल भी सकते हैं। जिस की चर्चा कर चुके हैं। हम ध्यान द्वारा भी स्वर बदल सकते हैं। ध्यान के किसी भी आसन पर बैठ कर उस स्वर पर ध्यान केन्द्रित करें जिसे चलाना हो। कुछ ही देर में वह स्वर चलने लगेगा। सुषमना स्वर को चलाने के लिये नाक के सिरे पर बिंदू को देखे और उस पर ध्यान केन्द्रित करें। फिर बायें हाथ से दायें कॉंख और दायें हाथ से बायें कॉंख को दबा ले। कुछ ही देर में सुषमना नाड़ी स्वर चलना आरम्भ हो जायेगा। यह स्वर ध्यान अभ्यास के लिय अति उपयोगी है। चाहे कोई स्वर चल रहा हो लम्बे लम्बे सांस ले। इस तरह सांस लेने से इस का प्रभाव हर एक कोशिका पर पड़ता है। हरेक कोशिका को पर्याप्त ऑक्सीजन तथा जीवनी शक्ति मिलती है। जिससे हम तरोताजा व निरोगी रहते हैं। सांस और शक्ति केन्द्र मामानामहाजन मनुष्य अपने मस्तिष्क का 10% भाग ही उपयोग कर रहा है, शेष 90% सुप्त ही पड़ा है। दुनिया मानती है कि 90% सुप्त मस्तिष्क को जागृत करना बहुत ही मुश्किल है। इस सुप्त शक्ति में एक कुंडलनी शक्ति है जिसे अगर हम जागृत कर ले तो हम भगवान के समान शक्तियों से सम्पन्न हो सकते हैं। परंतु माना जाता है कि यह बहुत दुर्लभ है। कोई कोई युग पुरुष ही इसे जागृत कर सकता है। इसके लिये बहुत तप करना पड़ता है। यह संसार रहस्यों से भरा हुआ है। कोई भी चीज का हमें ज्ञान न हो तो वह बहुत मुश्किल लगती है। जब हमें ज्ञान हो जाता है उस से हम सहज ही लाभ लेते हैं। आज विज्ञान के साधनों से हम मंगल ग्रह तक पहुँच गये हैं। विश्व के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से हम मोबाइल से बात कर सकते हैं। बात करते हुये उसका चित्र भी देख सकते हैं। आध्यात्मिक शक्तियों को कैसे प्राप्त करें उसकी विधि किसी को मालूम नहीं है। जिसके कारण मनुष्य आज तक सुख शांति से वंचित है। चाहे कितने ही साधन हो सुख हो फिर भी मन में अनजानी सी कमी/ खालीपन महसूस होता है। जितनी भी आध्यात्मिक शक्तियां या सिद्धियां हमारे शरीर में हैं। यह शक्ति रीढ़ की हड्डी के जो मनके हैं उनके अन्दर रहती है। जिन मणकों के अन्दर वह शक्तियां है उन्हें ऊर्जा चक्र कहते चक.मणिपुर चक्र,अनाहत चक्र, जागरण के लिये बहुत बाबा ने हमें आज्ञा चक्र हैं। इन ऊर्जा चक्रों के नाम हैं। मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपर: हृदय चक्र, विशुद्धि चक्र, आज्ञा चक्र और सहस्त्रार चक्र । इन चक्रों के जागरण कठिन साधनायें बताई गई हैं जिन्हें कर पाना बहुत ही मुश्किल है। शिव बाबा ने हो में टिकना कितना सहज रीति से सिखा दिया है। जिसे हरेक व्यक्ति सहज ही अभी ईश्वरीय सख का अनुभव करता है और आज हम समाज की कितनी बडी सेवा सभी ऊर्जा चक्रों तथा हमारे दिमाग की 90% सुप्त शक्ति जिसे कुंडलनी कहते है चक्र की तरह सहज जागृत कर सकते हैं।

(प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍व विद्यालय)

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