आंतरिक बल (भाग – 1)-प्रेम ही जीवन है

दुख और सुख ही दर्शाता है कि आपने किस अनुपात में बुरा या अच्छा सोचाव किया है॥ हर प्रकार के व्यक्ति और परिस्थिति आपके सामने आयेगी, परंतु आपने चुनाव करना है, किसे। प्यार करते हैं। आप जो प्रतिक्रिया करते हैं, अच्छी व बुरी वही आपसे चिपक जाती है। कोई कुछ कहता या करता है, आप विचलित, नाराज व चिड़चिड़े हो जाते हैं। तुरंत इस नकारात्मक प्रतिक्रिया को बदलो। इससे नकारात्मक भावनाओं की शक्ति कम हो जाती है। उस समय सिर्फ मनपसंद चीजों पर सोचो। एक-एक करके मनपसंद चीजों पर तब तक सोचो जब तक कि बेहतर न लगने लगे। अपना प्रिय संगीत सुन सकते हैं। जिसने विचलित किया है उसमें प्रिय चीज कौनसी है. वह याद करें। काम मश्किल है, परंतु भावनाओं का स्वामी बनने का यह सबसे तेज तरीका है। प्रेम की शक्ति से कैसी भी नकारात्मकता पर विजय पाई जा सकती है।

प्रेम और कवच – हम अपने को सर्दी या गर्मी, आँधी व तफान की मार से बचाने के लिये घर बना कर रहते। हैं। इससे हम सुरक्षित रहते हैं। घर कवच का काम करता है। रास्ते की धूल एवं काटी में को बचाने के लिये हम जूते पहनते हैं। जूते कवच का काम करते हैं। यात्रा करते समय हेलमेट या बेल्ट आदि का काम करते हैं जिससे अचानक दुर्घटना आदि होने पर ये हमारा कवच का काम करते हैं तथा हमारी जान बच जाती है। मॉं बाप एवं सगे सम्बन्धी और परिजन हमारे को विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों से बचाते हैं, रक्षा करते हैं, हिम्मत देते है। इस तरह हमारे लिये ये कवच साबित होते हैं। पुलिस, न्यायालय, सेना एवं सरकार हमारे जीवन को दूसरों से बचाने के लिए सुरक्षा कवच हैं। जिस की वजह से हम फलते व फलते हैं। ऐसे ही प्रेम भी हमें पॉंच विकारों एवं पॉंच सूक्ष्म विकारों से बचाता है, हर सम्बन्ध, हर समस्या से रक्षा करता है अर्थात् हमारे आसपास सुरक्षा का चक्र बन जाता है जिससे हम सुरक्षित रहते हैं। और जीवन में विकास करते हैं। सभी शारीरिक क्रियाएं एवं लोगों के व्यवहार एवं हमारी प्रतिक्रियाएं नहीं बदली जा सकती, परंतु अपने अन्दर प्रेम की भावनायें लाते ही बाहरी चीजें बदलने लगती हैं। प्यार की शक्ति अन्दर से ही निकलती है और प्यार हमें ही देना है। जब आप खुश होते हैं या स्नेह में होते हैं तो उस कमरे के दूसरे कोने में बैठे व्यक्ति को भी यह महसूस होने लगता है। आप जितना प्रेम देंगे उनता ही वातावरण व्यक्ति और वस्तु को प्रभावित करेंगे। जब सारे लोग एक-दूसरे को प्यार करेंगे तो हमारे विचार सूक्ष्म में ऐसा सुरक्षा चक्र बनायेंगे कि शक्तिशाली लोग कमजोरों पर बल प्रयोग नहीं करेंगे। बहूसंख्यक लोग अल्पसंख्यक लोगों का दमन नहीं करेंगे। अमीर लोग गरीबों का मजाक नहीं उड़ाएगे। बड़े लोग छोटों पर जुल्म नहीं करेंगे। चालाक लोग भोले-भाले लोगों को धोखा नहीं देंगे। प्रेम देने के अवसर आपको हर रोज मिलते हैं। प्रेम देंगे तो इतना लौटकर आयेगा कि आप उसकी कल्पना नहीं कर सकते। आप किसी को प्रेम देंगे तो वह उस पर इतना सकारात्मक असर डालेगा कि वह किसी तीसरे को प्यार देगा। इस श्रृंखला में जितने भी लोगों पर सकारात्मक असर होता है, आपका प्रेम जितनी भी दूर यात्रा करता है, वह सारा का सारा प्रेम लौटकर आता है और आपके चारों तरफ मजबूत कवच बन जाता है, जिससे आप सदा अतिइन्द्रिय सुख महसूस करेंगे।

प्रेम और परत – आपने जिस पहले व्यक्ति को प्रेम दिया सिर्फ उसका ही प्रेम नहीं मिलता, बल्कि हर। प्रभावित व्यक्ति का प्रेम भी मिलता है।

(क्रमश:357) (प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍व विद्यालय)

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