आत्मिक शांति की खोज – ध्यान टिकाने का तरीका

प्रथम चरण : ध्यान टिकाने के लिए समय व स्थान का चयन हमें ध्यान टिकाने के लिए एक ऐसे समय एवं स्थान का चयन करना चाहिए, जिसमें हम ारे आस-पास का वातावरण कम से कम विघ्न डाले। हमें ऐसा स्थान एवं समय चुनना चाहिए, जब हमें टेलीफोन की घंटी न सुनाई दे तथा जिस वक़्त पूरा वातावरण गहरी शांति में डूबा हुआ हो। इसीलिए संत-महात्माओं ने प्रातः तीन बजे से छ: बजे का समय निश्चित किया है। पूर्वी देशों में इस समय को ’अमृत-वेला’ या ’ब्रह्म-मुहूर्त’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि यही समय सबसे शांत समय होता है। परन्तु आज के युग में यह भी ज़रूरी नहीं है। हम कोई भी समय चुन सकते हैं, जिसमें हमें एकांत मिलता हो। जैसे-जैसे हमारी एकाग्रता बढ़ेगी, हम शोरगुल में भी ध्यान टिका सकते हैं। पर शुरूआत में यही बेहतर रहता है कि हम ध्यान टिकाने के लिए ऐसा स्थान चुनें, जहॉं पर कोई आवाज़ न हो, टेलीफोन की कोई घंटी न बजे और कोई गतिविधि न हो। जब एक बार हम आंतरिक यात्राओं में निपुण हो जाएँ तो हम कहीं पर भी ध्यान टिका सकते हैं। पर शुरू-शुरू में, अगर वातावरण ध्यान टिकाने के लिए अनुकूल हो, तो वह अवश्य मददगार होता है॥ _हम सिर्फ उसी समय ध्यान टिकाएँ, जब हम पूरी तरह जागृत हों।

अगर हम बाहर से आते ही ध्यान पर बैठ जाते हैं और थके हुए होते हैं, तो सम्भव है कि हमें नींद आ जाए। इसलिए हमें एक ऐसे समय का चुनाव करना चाहिए, जो कि हमारे लिए सर्वोत्तम हो और जिस दौरान हम पूर्णतया जागृत और तनाव रहित हों। मुख्य बात यह है कि जब भी हमें। उचित समय और उचित स्थान मिले, हम ध्यान टिका सकते हैं। हमें बैठने के लिए हमेशा एक आरामदेह मुद्रा अपनानी चाहिए जिसमें हम ज्यादा देर तक बिना तकलीफ के बैठ सकें । बैठने का स्थान हम घर के किसी भी भाग में निश्चित कर सकते हैं, जहॉं कम से कम शोर-गुल हो । यह जरूरी नहीं कि ध्यान के लिए हम घर से कहीं बाहर एकांत में जाएँ। ध्यानअभ्यास हम किसी भी स्थान पर कर सकते हैं। बैठने के लिए हम कोई भी मुद्रा अपना सकते हैं : हम कुर्सी पर, फर्श पर या सोफे पर बैठ सकते हैं। इसके अतिरिक्त हम चौकड़ी लगाकर बैठ सकते हैं या पैर सीधे रखकर बैठ सकते हैं। हम खड़े होकर या लेट कर भी ध्यान टिका सकते हैं। मुख्य बात यह है कि ध्यान के लिए हमें शरीर को तकलीफ देने की आवश्यकता नहीं है। जो भी आसन हम ध्यान के लिए चुनें, वह ऐसा हो जिसमें हम अधिक से अधिक समय तक स्थिर रह सकें। मन को स्थिर करने से पहले, तन को स्थिर करना ज़रूरी है। जिस भी तरीके से हम बैठे, उसमें शरीर हिलना-डुलना नहीं चाहिए । जो लोग शारीरिक समस्या के कारण बैठ नहीं सकते. वे लेट कर भी ध्यान टिका सकते हैं। पर आमतौर से, लेटकर ध्यान टिकाने सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि इसमें नींद आ जाने की आशंका रहती है।

(क्रमश:170) (कृपाल आश्रम, अहमदनगर) 

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