प्रेरक वचन दादी जानकी के – ईश्वर को जानना

हम स्वार्थ भरी इच्छाओं के पीछे लगे रहते हैं और यह स्वॉंग भरते हैं कि हम जो कर रहे हैं, दूसरों के हित के लिए कर रहे हैं। हम अपनी गलतियों को छिपाते हैं, धीरे-धीरे अपनी चेतना को मिटा डालते हैं और प्रेम एवं करुणा से ओत-प्रोत अपनी उत्कृष्ट प्रकृति का दमन करते रहते हैं।

भटका हुआ देवत्व

हमें ईश्वर से जो शक्ति प्राप्त होती है, वह सत्य की शक्ति होती है। प्रतिदिन के साधारण जीवन में, दैहिक-चेतना के माध्यम से, हममें से अधिकतर लोगों ने आत्मवंचना का दामन पकड़ लिया है। हम स्वार्थ भरी इच्छाओं के पीछे लगे रहते हैं और यह स्वॉंग भरते हैं कि हम जो कर रहे हैं, दूसरों के हित के लिए कर रहे हैं। हम अपनी गलतियों को छिपाते हैं, धीरे-धीरे अपनी चेतना को मिटा डालते हैं और प्रेम एवं करुणा से ओत-प्रोत अपनी उत्कृष्ट प्रकृति का दमन करते रहते हैं। हम अपने आक्रोश को उचित ठहराते हैं, अपने दुश्मनों को अमानवीय अर्थात् जानवर बना देते हैं और अपने कमजोर तथा स्वार्थी व्यवहार के लिए कारणों एवं बहानों का सहारा लेते हैं। हम सबने किसी-न-किसी अंश तक, अपनी सच्चाई को खो दिया है, क्योंकि हमने अपने देवत्व की अनदेखी की है। हम चेतना की संतानें हैं और जब हमारी चेतना भौतिक जगत् में अत्यधिक निमग्न हो गई, हम भूल गए कि हम आत्मा हैं।

(प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍व विद्यालय) (क्रमश:16)

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