आत्मिक शांति की खोज – ‘ज्योति’ व ‘शब्द’ का अनुभव

’ज्योति’ एवं ’श्रुति के द्वारा ही इस सृष्टि की रचना हुई है। इसी से सारे खंड-मंडल अस्तित्व में आए हैं। इसी के द्वारा यह भौतिक संसार बना, इंसान बना और चौरासी लाख प्रकार के जीवजंतु बने। यह शक्ति, जो परमात्मा में से निकली थी, जाकर उसी में लीन हो जाती है। जब आत्मा अपने ठिकाने या’नी शिव-नेत्र पर एकत्र हो जाती है, तो यह ’ज्योति’ और ’श्रुति’ की धारा को पकड़कर उच्च रूहानी मंडलों की यात्रा कर सकती है और अंत में अपने स्रोत, प्रभु तक पहुँच सकती है। वह प्रक्रिया, जिसके द्वारा हमारी आत्मा हमारे अंतर में गूंज रही ’ज्योति’ और ’श्रुति की धारा से जुड़ती है, ध्यान-अभ्यास कहलाती है।

ध्यान के द्वारा ज्योति से जुड़ना – ध्यान या तवज्जोह हमारी आत्मा का बाहरी रूप है। अभी हमारी सारी तवज्जोह पॉंच इंद्रियों के द्वारा इस बाहरी जगत में फैल रही है। इसीलिए हमें अंतर की रोशनी दिखाई नहीं देती। हमारी पॉंच इंद्रियॉं हैंदेखने की, सुनने की, सूंघने की, चखने की और स्पर्श की। इनके द्वारा हमारी तवज्जोह पूरे शरीर में और बाहरी जगत में जा रही है। हमें अपना ध्यान अपने शरीर से और बाहरी संसार से हटाकर, दो भ्रूमध्य, आत्मा के ठिकाने पर एकत्र करना है। इस स्थान को विभिन्न धर्मों में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है, जैसे कि शिव-नेत्र, दसवॉं-द्वार, दिव्य-चक्षु । आदि। सादे लफ्जों में, ध्यान-अभ्यास का अर्थ है, अपनी तवज्जोह को। बाहरी संसार से हटाकर, शिव-नेत्र पर एकाग्र करना । जब हम अपना ध्यान इस स्थान पर टिकाते हैं, तो हम आंतरिक ज्योति को देखने लगते। है और अलौकिक संगीत (’शब्द धुन) को सुनने लगते है।

कुछ योग की क्रियाएँ ऐसी हैं, जिनके द्वारा शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं को बस में किया जा सकता है। हमारे शरीर में दो धाराएँ काम करती हैंं, एक प्राणों की धारा और एक सुरत की धारा । प्राणों की धारा वह हैं, जिसके द्वारा शरीर की विभिन्न स्वचालित प्रक्रियाएँ नियंत्रित होती हैं, जो कि शरीर को जिंदा रखती हैं । प्राणधारा केद्वारा हमारे बाल और नाखून बढते रहते हैं, सांसें स्वत: ही चलती रही हैं तथा हमारा खून दौरा करता है । अंतरिक ‘ज्योति’ और ‘श्रुति’ पर ध्यान टिकाने की विधि में हम अपनी प्राणों की धारा को नहीं छेडते; वह सामान्य रुप से चलती जाती हैं, ताकि जिन-जिन प्रक्रियाओं पर हमारा जीवन आधारित है, उनमें कोई विघ्न नहीं पडता ।

(क्रमश:167) (कृपाल आश्रम, अहमदनगर)

ई- पेपर  बातम्या   आत्मधन  ज्योतिष  वास्तुशास्त्र  संस्कृती  आरोग्य  गृहिणी  पाककला  सौन्दर्य  मुलांचे विश्व  सुविचार  सामान्य ज्ञान   नोकरी विषयीक   प्रॉपर्टी   अर्थकारण   मनोरंजन   तंत्रज्ञान  क्रिडा  पर्यटन  निधनवार्ता   पोल  प्रश्नमंजुषा