अनमोल रत्न (भाग – 1) -ऋद्धियाँ-सिद्धियाँ संत पर प्रभाव नहीं डालती

एक बार फ्रांस से एक व्यक्ति ने मुझे लिखा, मैंने सुना है कि आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा मैं यहीं बैठे-बैठे आपका इलाज कर सकता हूँ । इस पर मैंने कहा, तुम ऐसा नहीं कर पाओगे। मैंने कारण भी बताया कि आप अपने से कमजोर आदमी पर असर डाल सकते हैं लेकिन अपने से ज्यादा ताकतवर पर नहीं । जिन की इच्छाशक्ति आपसे कमजोर है, आप उनका उपचार कर सकते हैं, अपने से मजबूत इच्छाशक्ति वालों का नहीं । तो मैंने उसे लिखा कि यदि प कोशिश भी करें तो भी आप मेरा इलाज नहीं कर सकते ।

उसने पूरी कोशिश की, पूरा जोर लगाया, पर वो मेरा इलाज न कर सका । आप प्रार्थना कर सकते हैं, हे सत्गुरु! अमुक व्यक्ति की सहायता करो इसमें कोई हर्ज नहीं । एक बार कुछ लोगों ने, मैं नाम तो नहीं लेना चाहूँगा, कुछ तांत्रिक लोगों को बुलाया और उनसे कहा कि वो मुझ पर अपने तन्त्र का जादू चलायें । उन्हें इस काम के लिए काफी रकम दी गई । मुझ पर प्रहार करने के लिए उन्हें एक खुले मैदान में बैठा दिया गया ताकि मन्त्र शक्ति से वो जादू चला सकें । यद्यपि इस शक्ति द्वारा भी प्रभाव डाला जा सकता है लेकिन मुझ पर उनके तन्त्रों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा ।

एक बार मैं रेलगाड़ी में सफर कर रहा था तो वहाँ एक आदमी आया और वो यात्रियों के विचारों को पढ़ने लगा । उसने कई लोगों के मन की बात, जो वो सोच रहे थे, वहीं खड़े-खड़े उनको बता दी । मैं भी उसी डिब्बे में बैठा था । वो मेरे पास आया और कहने लगा, आप भी कुछ सोचिए, मैं बता दूंगा कि आप क्या सोच रहे हैं । मैंने कहा, आप ऐसा नहीं कर पायेंगे । यह हजूर महाराज जी के चरणों में आने से कई वर्ष पहले की बात है । उस व्यक्ति ने जिद पकड़ ली, इसके अलावा अन्य दूसरे यात्रियों ने भी मुझ पर जोर डाला कि मैं मन में कुछ सोचें और उस व्यक्ति को एक मौका दें कि वो बता सके कि मैं क्या सोच रहा था ।

(कृपाल आश्रम, अहमदनगर)