सच्चा सुख (शिक्षाप्रद आध्यात्मिक कथाएँ) – गुरु और परमात्मा

हमारी आत्मा जो दूध की तरह पवित्र है, उसमें हम ‘जाग’ लगायें और जब किसी सत्गुरु की दया-मेहर हम पर हो जाये, तो दूध से दही जल्दी बन जाता है। परमात्मा के बारे में बहुत से महापुरुषों ने बहुत कुछ लिखा है। हर एक संत-महात्मा ने हमें यह समझाने की कोशिश की है कि हमारे इस जीवन का ध्येय क्या है।

परमात्मा अलख, अगम, अगोचर और अनामी है, उसे किसी भी नाम से समझाया नहीं जा सकता है। जितनी भी भाषायें हैं, चाहे हिन्दी हो, पंजाबी हो, सब इंसान ने बनाई हैं और क्योंकि ये भाषायें इंसान ने बनाई हैं, इसलिए ये वही बातें समझा सकती हैं जो दुनिया की हैं। ये माया की दुनिया के लिए हैं और इसी दुनिया की चीजें इन भाषाओं के ज़रिये समझी जा सकती हैं। किसी भी भाषा में, परमात्मा क्या है और उसका हमारी आत्मा से क्या नाता है, यह समझाया नहीं जा सकता, लेकिन कोशिश की जा सकती है।

अध्यात्म-विद्या अनुभव का रास्ता है, experience का रास्ता है। परम संत कृपालसिंह जी महाराज ने फ़रमाया है कि यह किसी संत से जुड़ने का रास्ता है। संत-महात्माओं ने प्रभु को दो तरीकों से समझाने की कोशिश की है। एक जिसे हम bsolute God कहते हैं, वह पिता परमेश्वर, जिसे हम अनेक नामों से पुकारते हैं; राम कहें, अल्लाह कहें, वाहेगुरु कहें, God कहें, जिसने सारी सृष्टि की रचना की है। दुसरे जिसे ‘गॉड इन टू एक्सप्रेशन पॉवर’ कहते हैं। शुरू में प्रभु अकेला था। उसने एक से अनेक होने का संकल्प किया, तो उसने दो रुप धारण किये।

एक ज्योति का और दूसरा श्रुति का, जिसे ‘लाईट अॅण्ड साऊंड ऑफ गॉड’ कहा जाता है। इसी के द्वारा सारी सृष्टि की रचना हुई। सभी धर्मग्रंथों में प्रभु को पाने के तरीके बताए गए हैं। जब प्रभु की सत्ता नीचे उतरी, तो उसमें जडता मिलती गई।

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