सच्चा सुख (शिक्षाप्रद आध्यात्मिक कथाएँ) – गुरु और परमात्मा

लेकिन जड़ता ने हम पर इस प्रकार जादू कर दिया है कि हमें माया ही सत्य नज़र आ रही है। मानव चोला मिलते ही हम असत्य को सत्य मानकर अपना सारा जीवन गुज़ार देते हैं, लेकिन जब हम महापुरुषों की शरण में पहुँचते हैं, तो वे हमें जड़ और चेतन के अंतर को समझाते हैं। वे हमें पढ़ाते-लिखाते नहीं, किन्तु सच्चाई यह है कि सत्य उनके रोम-रोम में बसा होता है और वह हम तक छूत की बीमारी की तरह पहुँच जाता है।

परम संत कृपालसिंह जी महाराज फरमाया करते थे : Spirituality cannot be bought and cannot be taught, but it can be caught from someone who is One with the Lord,’

रूहानियत को सीखा नहीं जा सकता, ख़रीदा नहीं जा सकता, लेकिन जब हम किसी जीवित सत्स्वरुप महापुरुष की शरण में जाते हैं, तो हम रूहानियत को पकड़ सकते हैं। जब तक दूध में थोडासा जाग (खट्टा) न लगाया जाए, तब तक वह दही नहीं बनता, वही हालत इंसान की है। इस शरीर को जिसे हम अपना असली रुप समझते हैं, यह माया का मॅटर का बना हुआ है जब की हमारी आत्मा चेतन है, ज्ञान संपन्न है।

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