सच्चा सुख (शिक्षाप्रद आध्यात्मिक कथाएँ) – गुरु और परमात्मा

महापुरुष, Living Master या मुर्शिदेकामिल के नाम से पुकार सकते हैं। किसी महापुरुष की शरण में पहुँचना बहुत बड़ी बरक़त है। सभी महापुरुषों, जैसे कबीर साहिब, गुरु साहिबान और दूसरे संतों के साथ साथ इस शब्द में सहजोबाई जी ने हमें गुरु का महत्त्व बताया है। इस शब्द में पहली दो पंक्तियों में ही सहजोबाई जी ने रूहानियत का निचोड़ हमारे सामने पेश कर दिया है।

यहॉं वे फ़रमा रही हैं :

हरि किरपा जो होय तो, नाहीं होय तो नाहिं।

पै गुर किरपा दया बिनु, सकल बुद्धि बहि जाहिं॥

84 लाख जियाजून में मानव चोले को सबसे उत्तम माना गया है क्योंकि इसमें आकाश तत्व प्रबल है, इसी कारण यह सत्य और असत्य का निर्णय कर सकता है। सत्य क्या है, इसके बारे में इंसान निर्णय कर सकता है और सच्चाई को ग्रहण कर सकता है, असत्य को छोड सकता है। जब हमें मालूम हो जाए कि असत्य क्या है, तो उससे हम दूर हटेंगे, सच्चाई की ओर चलेंगे। जडता असत्य है और चेतनता सत्य है।

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