अनमोल रत्न (शिक्षाप्रद आध्यात्मिक कथाएँ) – बुराई का बदला बुराई से न दो

बुराई का बदला बुराई से न दो खून को खून से नहीं, पानी से ही धोया जा सकता है । कोई आपका बुरा सोचता है तो सोचने दो । आप उसका असर न लो । उसकी बुरी भावना उसे मुबारक, आप उसे कबूल न करो । बुरी भावना के बदले में उसके प्रति शुभ भावना प्रसारित करो । यही एक मात्र उपाय है । मेरे गुरुदेव, हुजूर बाबा सावनसिंह जी महाराज, जब चोला छोड़ कर गये तो मैं ऋषिकेश चला गया था । जब मैं वहॉं से वापस लौटा तो एक व्यक्ति मेरे पास आया और मुझे बुरा भला कहने लगा, यहॉं तक कि गाली-गलोच पर उतर आया । शायद उसे इस बात की उजरत दी गई थी । वो रोज़ाना, नियम से मुझे गालियॉं देता तथा बुरा भला कहता । बीबी हरदेई जो वहॉं मौजूद थी, कहने लगी, मैं यह सब बर्दाश्त नहीं कर सकती ।

मैं इसे जान से मार दूंगी । अरे भई, तुम अपने कानों में रूई दे लो और भजन सुमिरन शुरू कर दो । वो गालियॉं देता रहे, तुम उसका असर मत लो और अपना ध्यान दूसरी तरफ कर लो । कुत्ते भौंक रहे हों तो जरूरी नहीं कि उन्हें सुना जाए । अगर तुम्हारे बारे में कोई ऐसीवैसी बात कहे, या निन्दा-चुगली करे, गुस्सा तुम्हें तभी आएगा जब तुम्हें पता चल जाए कि वो तुम्हारे बारे में किसी से उलटी-सीधी बातें कर रहा था । तुम स्वीकार क्यों करो कि वो तुम्हारी बुराई कर रहा था, यही समझो कि वो बात तुम्हारे लिए नहीं कहीं गयी । या फिर अपने अन्तर में झॉंक कर देखो कि जो बात वो तुम्हारे बारे में कहता है, वो सही है या नहीं । क्या तुम्हारे अन्तर में वो त्रुटियॉं हैं? यदि हैं तो उसका आभार मानो । यदि नहीं हैं तो प्रार्थना करो कि प्रभु उस व्यक्ति को सुमति प्रदान करें ।