सच्चा सुख (शिक्षाप्रद आध्यात्मिक कथाएँ) – खोज

जो छठा चक्र है, वह क्या है? वह आज्ञा चक्र है, जो दो आँखों के बीच में है, जिसे शिवनेत्र कहा जाता है, सिंगल या थर्ड आय कहा जाता है । वे (संत दर्शनसिंहजी) फरमाते हैं :

खुदा है खुद जिसके दिल में

पिनहां वह ढूँढता है खुदा कहॉं है

– मताए नूर, गज-4

खुदा इंसान के अन्दर है, मगर इंसान उसे बाहर तलाश कर रहा है । परमात्मा हम सबके भीतर है मगर हम उसे तीर्थ-स्थानोंपर तलाश करते है । जब हम महापुरुषों की वाणियों को पढते हैं, तो हमें यह समझ आ जाती है कि परमात्मा अंतर में है । अगर किसी ने प्रभु को पाया है, तो अपने भीतर जाकर ही पाया है ।

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