सच्चा सुख (शिक्षाप्रद आध्यात्मिक कथाएँ) – तारणहार

अगर हमने अपने आपको जानना है, परमात्मा को पाना है तो हम अपना ध्यान बाहर से हटाएं। संत तुलसी साहिब ने फ़रमाया है :

दिल का हुजरा साफ कर जानां के आने के लिए।

ध्यान गैरों का उठा उसके बिठाने के लिए ।

अगर इस जिंदगी का ध्येय पूरा करना है तो हम अंतर्मुख हों, शब्द के साथ जुड़ें, इस दुनिया से ध्यान हटाकर अंदर की दुनिया में जायें। किसी महापुरुष की शरण में पहुँचकर शब्द की कमाई करें, वे हमें अन्दर के मंडलों में रसाई करा देंगे। यह रास्ता सीखा नहीं जा सकता, ख़रीदा नहीं जा सकता, पढ़ाई से पाया नहीं जा सकता, लेकिन किसी महापुरुष की शरण में आकर पकड़ा जा सकता है।

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