व्यक्ति एक व्यक्तित्व अनेक ब्रह्माकुमार भ्राता जगदीश चन्द्र एक जीवन्त जीवन-पथ

मैं तो यही कहूँगी कि ऐसी महान् आत्मा जो हमारे यज्ञ की फाउण्डेशन थी, उनके त्याग, तपस्या और सेवा का क्या वर्णन करें! वे त्यागी भी थे, तपस्वी भी थे और सेवा में नम्बर वन थे। ’हाँ जी’ के मंत्र का पक्का साधक यज्ञ में कभी भी, किसी भी प्रकार की सेवा की आवश्यकता होती थी, जगदीश भाई हाज़िर हो जाते थे। बाबा को, दादियों को सदा ‘हाँ जी, हाँ जी’ करते थे। कभी किसी भी बात पर उन्होंने ’ना’ नहीं कहा। बाबा का कार्य है, करन-करावनहार बाबा है, ऐसा संकल्प उनके मन में हमेशा रहता था। मैं तो यही कहूँगी कि उन महान् आत्मा, पुण्य- आत्मा, श्रेष्ठ आत्मा के त्याग और तपस्या से आज तक भी बहुत तरह के कार्य चल रहे हैं। हम सबके दिल में उनकी याद, उनके प्रति सम्मान की भावना सदा रही और अभी भी रहती है। इतने गुण, इतनी कलायें संगमयुग में ऐसी आत्माओं में होना, यह परमात्मा की बहुत बड़ी देन है, वरदान है।

उस प्रभु की देन और वरदान को, एक उपहार समझकर उन्होंने सदा सेवा में उपयोग किया। उनके लिए कुछ भी असम्भव नहीं था, कुछ भी कठिन नहीं था। हर कार्य को वे सहज और सरल तरीके से कर लेते थे। जगदीश भाई के प्रति हमारी सद्भावना, शुभकामनायें सदैव हैं। मैं मानती हूँ कि जहाँ भी इस समय वे अपना पार्ट बजा रहे हैं वहाँ भी ईश्वरीय कार्य में पूरे सहयोगी हैं। ज्ञान के मोतियों से भरपूर कर उमंग-उत्साह भरते थे आफ्रीका महाद्वीप की सेवा निर्देशिका ब्रह्माकुमारी वेदान्ती दीदी जी, भ्राता जगदीश जी के बारे में अपने संस्मरण इस प्रकार बाँट रही_ हैं मैंने सन 1965 में ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त किया।

जब मैं पहली बार मधुबन दादी जानकी जी के साथ आयी थी, उस समय दादी जानकी जी ने मुझे जगदीश भाई का परिचय करवाया था। मैं दर्शनशास्त्र और मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर पढ़ाई पढ़ रही थी तो मेरे मन में बहूत-से प्रश्न थे। उन सब प्रश्नों की जगदीश भाई के साथ चर्चा की। जगदीश भाई ने मेरे सब प्रश्नों के उत्तर बड़े प्यार से दिये और कहा कि ’वेदान्ती बहन, आपको प्रश्न तो उठते ही रहेंगे लेकिन आप बाबा की मुरली का अध्ययन करो, आपको सब प्रश्नों के उत्तर मिलते जायेंगे; बाबा के ज्ञान में निश्चय रख आगे बढ़ते रहो। कहते हैं ना विद्यार्थी जीवन स्वर्णिम जीवन है, आप भगवान के विद्यार्थी बनो और इस जीवन को मूल्यवान बनाओ। उनकी इन बातों से मुझे ब्रह्माकुमारी जीवन बनाने की प्रेरणा मिली। (प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय) (क्रमश : 60)

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