व्यक्ति एक व्यक्तित्व अनेक -ब्रह्माकुमार भ्राता जगदीश चन्द्र एक जीवन्त जीवन-पथ

हाँ, याद आ गया। पहाड़ी पर जाना है। कौनसी पहाड़ी ? बाबा की पहाड़ी। वह रही, वह, देखो न वह रही! उसकी ओर तो चल ही रहे हैं परन्तु आप जो कह रही हैं, उस पर भी चलेंगे अगर ड्रामा में होगा। हमारी आज़माइश और आपकी फ़रमायश, ड्रामा ने चाहा तो पूरी हो जायेगी। आपने इतना स्नेह से लिखा। चलो स्वप्न में भी इस आत्मा के प्रति आपका ध्यान तो गया। उसके लिये कोटि-कोटि धन्यवाद। सभी मधुबन- निवासियों को और सर्विस-साथियों को सस्नेह याद। ‘शिव बाबा की याद में, भ्रातृस्नेह में, ब्रह्माकुमार जगदीशचन्द्र’ कई बार बहनों की क्लास में, दादियों की सभा में इस तरह कविता के रूप में, शायरी के रूप में सुनाकर, गाकर भी सबको खुश करते थे।

उनका हमेशा यही लक्ष्य रहता था कि बाबा का हर बच्चा सदैव उमंगउत्साह में रहे। बड़ों के प्रति अथाह सम्मान दादियों के प्रति भ्राता जगदीश चन्द्र जी को बहुत स्नेह और रिस्पेक्ट था। सदा उनके त्याग और तपस्या का वर्णन करते रहते थे। वे कहा करते थे, जो त्याग, तपस्या इन दादियों ने की है, वो हम सबके लिए आदर्श है। इन आदर्शों को हमें अपने सामने रखना चाहिए, अपने जीवन में धारण करना चाहिए। जितना स्नेह और रिस्पेक्ट उनका दादियों से था, उतना ही दादियों का भी उनके प्रति था । (प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय) (क्रमश : 70)

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