शाश्‍वत यौगिक खेती (नये युग के लिए नया कदम) – शाश्‍वत यौगिक खेती – योजना की आवश्यकता

जिन्हों का परमात्मा के ऊपर विश्वास है वह सभी मेरे जैसे प्रयोग व अनुभूति कर सकते हैं लेकिन उसके लिए प्रकृति तथा वृक्ष-वनस्पतियों से प्रेम और स्नेह से रिश्ता जोड़ना बहुत जरूरी है। तर वनस्पतियों का जादूगर ’ल्युथर बरबॅक’ ने प्रयोग द्वारा केकतस (निवडूंग) की वनस्पति को अर्जी डाली कि वे अपने काटें निकाल लेवे ।

बरबॅक के प्यार के खातिर निवडुंग ने भी उनका कहना मान लिया और अपने संरक्षण हेतु जो कॉटे थे वे निकालने के लिए तैयार हुए । उनके पास पेड़ पौधों के साथ संवाद करने की शक्ति थी, प्रेम और स्नेह था । इसी कारण 18 अप्रैल 1906 के भूकम्प में जब सैनफ्रांसिस्को का विध्वंस हुआ तब बरबॅक का मकान भूकम्प के केन्द्र बिन्दु के पास ही था फिर भी उनके मकान के झरोखों का एक कॉंच भी नहीं टूटा ।

बरबॅक का कहना यही था कि नैसर्गिकता के साथ विलक्षण दोस्ती का सम्बन्ध जुटाने का यह परिणाम था । इन सभी प्रयोगों को सुनते हुए मन में यह विश्वास होने लगता है कि हमें भी ऐसे ही निसर्ग के साथ दोस्ती करना बहुत आवश्यक है । विज्ञान के युग में हमारा जीवन कृत्रिम बनता जा रहा है, हमें फिर से निसर्ग के साथ रिश्ता जोड़कर चलना बहुत आवश्यक है । आज हर एक किसान खेती को व्यवसाय समझकर कर्म कर रहा है । खेती को अनाज उत्पादन करने का साधन समझ रहे हैं ।

इसी कारण जमीन तथा वनस्पति के साथ जो अपनापन, स्नेह, प्रेम चाहिए, उसका अनुभव हम नहीं कर पा रहे हैं । जमीन के साथ मॉं के रिश्तों से पालना देंगे और लेंगे तो वह धरती मॉं हमें बहुत कुछ देने के लिए तैयार है। अगर हमारा अपने ऊपर प्यार है, धरती मॉं से प्यार है और परमात्मा के ऊपर विश्वास है तो हम इस शाश्वत यौगिक खेती के माध्यम से सच्चे-सच्चे अन्न दाता बन फिर से इस भारत भूमि को सुजलाम् सुफलाम् बनाकर भारत को कृषिप्रधान बना सकते हैं।

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