शाश्‍वत यौगिक खेती (नये युग के लिए नया कदम) – शाश्‍वत यौगिक खेती – योजना की आवश्यकता

रासायनिक खाद के गलत प्रयोग के कारण जमीन में से कई सारे जीवाणु मारे जाते हैं, जिससे प्रकृति को दु:ख मिलता है, कुदरती नियमों में बाधा आती है और कीटनाशक छिड़कने से कीट तडफ-तडफकर मरते हैं । इसी तरह कीटकों को विष पिलाकर मारना यह भी तो पाप कर्म ही है । वास्तव में कोई भी प्रकार के कीट को मारना या नष्ट करना, यह हम मनुष्य आत्माओं का काम नहीं है, परन्तु उस कीट को नष्ट करने की जिम्मेदारी कुदरतने बनाकर रखी है अर्थात् कई और कीट हैं जो उस पर उपजीविका चला सके ।

कर्मों की गुह्य गति पर विचार करने से यह पता चलता है कि हमारे जीवन में जो भी समस्यायें या परिस्थितियॉं आती हैं, उनके पीछे एक ही कारण है और वह कारण है हमारे ही किये हुए बुरे कर्म । अगर कोई बीमारी आती है तो यह भी हिसाब-किताब है अर्थात् प्रकृति के नियमों में हमने रुकावट डाली है, प्रकृति को दु:ख दिया है । महाभारत में एक आख्यान है कि जब भीष्म पितामह जख्मी होकर शरशैय्या पर लेटे थे, तब उन्होंने श्रीकृष्ण जी को पूछा कि मैंने ऐसा कौन-सा विकर्म किया जो मुझे बाणों की शैय्या पर लेटे शरीर छोड़ना पड़ रहा है ?

तब श्रीकृष्ण जी ने भीष्म जी को बताया कि एक बार भीष्म जी रथ में बैठकर गुजर रहे थे तब उनके सामने एक सॉंप आया जो रथ के नीचे आने से मरने वाला था। उस सॉंप को मरने से बचाने के लिए भीष्मपितामह जी ने सॉंप को उठाकर बाजू में फेंक दिया और भीष्म जी चले गये । उस समय वह सॉंप कॉंटों की झाड़ी पर जा गिरा इसलिए सॉंप हिल नहीं पाया, चल न सका और वह वहॉं ही मर गया ।

ई- पेपर  बातम्या   आत्मधन  ज्योतिष  वास्तुशास्त्र  संस्कृती  आरोग्य  गृहिणी  पाककला  सौन्दर्य  मुलांचे विश्व  सुविचार  सामान्य ज्ञान   नोकरी विषयीक   प्रॉपर्टी   अर्थकारण   मनोरंजन   तंत्रज्ञान  क्रिडा  पर्यटन  निधनवार्ता   पोल  प्रश्नमंजुषा