शाश्‍वत यौगिक खेती (नये युग के लिए नया कदम) – जमीन को शक्तिशाली बनाने के लिए

अलग-अलग फसलों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

4. पौधे लगाते समय, फल-फूल लगते समय और इसके तीन मास बाद ऐसे तीन बार, नत्र, स्फुरद और पोटाश की उपलब्धि करानेवाले जीवाणु संवर्धक प्रति एक किलो जीवामृत में मिलाकर छोड़ दें।

5. फल-फूल लगते समय और तीन मास बाद ऐसे दो बार 30 किलो अनाज की खाद और एक टन केंचुवे की खाद जमीन में जमीन गीली हो तब मिला दें। 6. नीम का पाउडर 50 किलो मास में एक बार पौधों के ऊपर से जमीन पर छिड़काएं।

मिक्स फसल – बैंगन के चारों तरफ दो लाइन मकई, एक लाइन चौलाई, आठ लाइन बैंगन, एक लाइन गेंदे के फूल के पौधे फिर बैंगन इस प्रकार से मिक्स करें। प्रति एक एकड़ में एक तुलसी का पौधा अवश्य लगायें।

वीज संस्कार 1. 100 ग्राम बीज को बीजामृत में भिगो दें। और उपर से पहले 2 ग्राम ट्रायकोडर्मा फफूंदी फिर 2 ग्राम अँझोटोबॅक्टर और पी.एस.बी. जीवाणु संवर्धक 2 ग्राम का लेप चढ़ाकर जमीन में बुवाई करें। ऊपर से एक लीटर जीवामृत पानी में मिलाकर सिंचाई करें।

जहॉं बीज बुवाई करनी है वहॉं गोबर की और केंचुवे की खाद जमीन में अवश्य मिलायें। 2. पौधे लगाने से पहले 10 ली. पानी में 40 ग्राम ट्रायकोडर्मा और 500 मि.ली. नीम अर्क मिलाकर पौधों की जड़ें तीन घंटों तक डुबोकर रखें। फिर जड़ों को झोटोबॅक्टर और पी.एस.बी जीवाणु संवर्धक लगाकर पौधे लगायें। फसल संरक्षण 1. बीज अंकुरित होने के बाद 1

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