शाश्‍वत यौगिक खेती (नये युग के लिए नया कदम) – जमीन को शक्तिशाली बनाने के लिए

अगर हमने जमीन को शक्तिशाली बनाया है, पर्यावरण निर्मित भी कर रहे हैं फिर भी अचानक वातावरण बदलने से कोई कीट या बीमारी आती है तो उसके लिए कीट रोधक और फफूंदी रोधक दवाइयों का इस्तेमाल करना आवश्यक है। इन दवाइयों के साथ हम योग के प्रयोग करते हैं तो कीट रोकने में 100 प्रतिशत सफलता मिलती है।

कई प्रकार की दवाइयॉं बनाने की विधि –

1) दशपर्णी अर्क : 1. कड़वे नीम के पत्ते – 5 किलो 7.शरीफा (सीताफल) के पत्ते – 3 किलो 2. कन्हेर के पत्ते – 2 किलो 8. रूई के पत्ते – 2 किलो 3. पपीते के पत्ते – 2 किलो 9. एरंडी के पत्ते – 2 किलो 4. करंज के पत्ते – 2 किलो 10. गुडवेल के पत्ते – 2 किलो 5. काँग्रेस घास के पत्ते – 1 किलो 11. हरी मिर्च कुटी हुई -2 किलो 6. सफेद धतूरा -2 किलो

यह सब सीमेंट या प्लास्टिक की टंकी में 200 लीटर पानी में मिलाकर 30 से 40 दिन तक सड़ने दें। टंकी का मुख मोटे कपड़े से बांधकर रखें। प्रतिदिन मिश्रण को दो बार डंडे से घड़ी की दिशा में हिलायें। 30-40 दिन बाद उसे छानकर 15 लीटर पानी में एक या दो लीटर (कीट की तीव्रता देखकर) मिश्रण मिलाकर कोई भी फसल पर किसी भी प्रकार की कीट के लिए छिड़काएँ। एक बार तैयार किया हुआ यह मिश्रण 6 मास तक इस्तेमाल कर सकते हैं। इस मिश्रण में 200 मि.ली. गोमूत्र मिलाना आवश्यक है।

2) नीम अर्क : 5 किलो कडुवे नीम के बीज को कूटकर 9 ली. पानी में रात भर भिगो दें और इसमें 500 ग्राम हरी मिर्च कूटकर मिलायें। इससे नीम अर्क अधिक प्रभावी बनता है। साथ ही एक ली. पानी में 200 ग्राम कोई भी वांशिग पाउडर भिगो दें। दूसरे दिन यह दोनों मिश्रण हिलाकर छान लें और 100 ली. पानी में मिलायें। जिस दिन इस्तेमाल करना है उससे एक दिन पहले यह मिश्रण तैयार करें। इससे कई प्रकार की कीट और फफूंदी जैसी बीमारी पर भी नियंत्रण होता है। (3) लिफ मायनर (नागअळी) नियंत्रण के लिए : 250 मि.ली. देशी गाय का छांछ, 50 ग्राम नींबू सत्व, 100 ग्राम गुड चाहिए ।

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