शाश्‍वत यौगिक खेती (नये युग के लिए नया कदम) – जमीन को शक्तिशाली बनाने के लिए

7) फसल पर छिड़काने के लिए टॉनिक : देशी गाय का दूध 3 लीटर, गोमूत्र 3 लीटर, नारियल का पानी 3 लीटर, केमिकल रहित गुड़ एक किलो, 200 ली. पानी में मिलाकर कोई भी फसल के ऊपर आवश्यकता अनुसार स्प्रे करें।

8) बीजामृत – देशी गाय का गोबर एक किलो, गोमूत्र एक ली., देशी गाय का दूध 200 मिली, बिना बुझा हुआ चूना 50 ग्राम, हींग 10 ग्राम, 10 ली. पानी में दो रात भिगो दें। प्रतिदिन मिश्रण को दो बार डंडे से घड़ी की दिशा में हिलाएं और मोटे कपड़े से मुख बांधकर रखें। दो दिन बाद इस बीजामृत को बीज संस्कार के लिए इस्तेमाल करें।

9) जैविक खाद (जीवाणु संवर्धक) :- (जैविक खाद बाजार में बनी-बनाई मिलती हैं।) ।

10) रायझोवियम जीवाणुसंवर्धक :- चौलाई, मूंगफली, मूंग, अरहर, उड़द, वाल, मोठ, ग्वार, सन, लैंचा, चना, मटर, सोयाबीन, लहसुन-घास इत्यादि के लिए इस्तेमाल करें। इससे – फसलो में 15 से 20 प्रतिशत बढ़ोतरी दिखाई देगी। वाणित बीज की अंकुरण क्षमता बढ़ती है। कागजी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। नाय जमीन में नायट्रोजन (नत्र) की मात्रा बढ़ती है। जमीन में कर्ब : नत्र का प्रमाण योग्य रहता है और जमीन शक्तिशाली बनती है।

(इ) अँझोटोबॅक्टर जीवाणु संवर्धक :- ज्वारी, गेहूं, धान, कपास, पत्तागोभी, फूलगोभी, सूर्य फूल, गन्ना, बाजरा, नाचणी, मकई और सब्जियों में गाजर, पालक, राजगिरा, करेला, मिर्च, बैंगन, टमाटर इत्यादि के लिए इस्तेमाल करें। इससे फसल की उत्पादन क्षमता बढ़ती है। बीज की अंकुरण क्षमता बढ़ती है। फसल की जड़ों की वृद्धि होती है । फसल के उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है। फफूंदी (बुरशी) के वृद्धि को प्रतिबंध करने में मदद करते हैं। सब्जी जैसी फसलों में प्रथिनों की बढ़त मटर में स्टार्च, कंद में, गन्ने में शक्कर की बढ़त होती है।

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