प्रेरक वचन दादी जानकी के – ईमानदारी की शक्ति

हमारी कमजोरियॉं और हमारे दोष हमें सुख के उस भंडार का अनुभव नहीं करने देते हैं । अनुभव के द्वारा ही मैं जीवन की यात्रा में इतना आगे बढ़ पाई हूँ । सच्चाई को गले लगाकर मैं सांसारिक चीजों के आकर्षण या प्रभाव से मुक्त हो गई । ईश्वरीय प्रेम पाकर मैंने जब यह जान लिया कि एक आत्मा के रूप में मेरा क्या अस्तित्व है और किससे मेरा नाता है, मेरा सारा जीवन बदल गया। मुझे प्रकाश मिल गया-सत्य, प्रेम और प्रकाश की शक्ति, जो टूटे अर्थात् मग्न हृदयों को जोड़ देती है और हमें संपूर्ण बनाती है ।

हमें जीवन भर ईश्वर के प्रति इतना सच्चा रहना चाहिए कि दूसरों को भी उसकी अनुभूति हो और उन्हें भी वही मिले । इस प्रकार वह दयालु परमेश्वर उन सब चीजों को ठीक कर देता है, जो उलट-पुलट हो गई हैं और हमारा जीवन हीरे जैसा मूल्यवान हो जाता है । मैं एक मॉं के रूप में आई हूँ । सन् 1974 में दादी ने भारत से प्रस्थान किया और अनेक वर्षों के लिए यू.के. में अपना डेरा बना लिया। उनके पास उस समय केवल अतिथि वीसा (विजिटर वीसा) था, इस कारण उनके लिए कहीं आना-जाना मुश्किल था । मैंने प्राधिकारियों से कहा, मैं यहॉं धन-दौलत अर्जित करने नहीं, बल्कि सेवा के लिए आई हूँ। मैं एक मॉं की हैसियत से आई हूँ ।

मैं चाहती हैं कि ईश्वर के सभी बच्चे खुश रहें।’’ स्त्रियॉं कभी-कभी डर जाती हैं, लेकिन मुझे कोई डर नहीं था । उन्होंने मुझे स्थायी निवासी का वीसा दे दिया। । तनावमुक्त होने का रहस्य है कि के आगे एक ’र’ लगा देंमतलब यह कि एक ही तनाव रखें । एक माध्यम बनने पर ध्यान लगाने का तनाव, सदैव इस बात से अवगत रहते हुए कि ऊपरवाला सबकुछ कर रहा है । मन में यह शंका लाने की जरूरत नहीं है कि यह या वह काम कैसे होगा, सिर्फ यह विश्वास रखें, अगर ऐसा होना है, तो ईश्वर सब करा देगा । यह कहना कि अमुक काम ’मैंने किया है, चोरी करने के समान है । ईश्वर हमारा उपयोग एक माध्यम के रूप में करता है, उसने ही हमें यह कार्य सौंपा है कि हम दूसरों को उस एक सर्वशक्तिमान को समझने योग्य बनाएँ ।

ई- पेपर  बातम्या   आत्मधन  ज्योतिष  वास्तुशास्त्र  संस्कृती  आरोग्य  गृहिणी  पाककला  सौन्दर्य  मुलांचे विश्व  सुविचार  सामान्य ज्ञान   नोकरी विषयीक   प्रॉपर्टी   अर्थकारण   मनोरंजन   तंत्रज्ञान  क्रिडा  पर्यटन  निधनवार्ता   पोल  प्रश्नमंजुषा