सच्चा सुख (शिक्षाप्रद आध्यात्मिक कथाएँ)

जैसे-जैसे हमारा ध्यान इस दुनिया से हटता जाता है, वैसे-वैसे हमारे कदम अपने निजधाम सचखंड की तरफ बढते चले जाते हैं । जिंदगी का मकसद यही है कि हम इस जिंदगी का पूरा-पूरा फायदा उठायें और वह फायदा हम तभी उठा सकते हैं, जब हमारा पूरा ध्यान प्रभु की ओर हो और तब इसी जिंदगी में हम परमात्मा से एकमेक हो सकते है । इस शब्द में गुरू अर्जनदेव जी महाराज प्रभु से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि हे प्रभु ! मुझे सद्गुणों के बारे में बता दो, उन्हें कूट कूट कर मेरी रग-रग में समा दो, ताकि मैं सद्गुणों से भर जाऊँ, ताकि मेरी यह जिंदगी सफल हो जाए, ताकि इस शरीर में होते हुए मेरा ध्यान आप की ओर हो और मैं आपसे जुड जाऊं । आगे गुरू अर्जनदेव जी महाराज फरमा रहे हैं : रूप हीन बुधि बल हीनी मोहि परदेसनि दूर ते आई ॥ यहॉं पर गुरू अर्जनदेव जी महाराज हमारी कमजोरियों की ओर हमारा ध्यान दिला रहे हैं । (कृपाल आश्रम, अहमदनगर) (क्रमश:148)

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